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"आकाश की बुलंदियों पर"

4.7
12

"आकाश की बुलंदियों पर".... ************************* अपने व्यक्तिगत कटु अनुभव की बात की जाए तो कलम को घिसते घिसते 60 वर्ष गुजर गए आंखों पर अंतिम नंबर का चश्मा भी चड़ गया किंतु आंखें फाड़ फाड़ कर ...

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लेखक के बारे में
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poet baba vk

घायल तन है.! और बिखरा हुआ मन है.! यह कोई हकीकत है कि सिर्फ पागलपन है.! --विचारक्रांति

समीक्षा
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  • author
    Risha Gupta
    05 മാര്‍ച്ച് 2020
    👍👍👍👍very harsh reality
  • author
    Asha garg
    05 മാര്‍ച്ച് 2020
    Superb explanation ✍️👍👍👍👍👍
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    Risha Gupta
    05 മാര്‍ച്ച് 2020
    👍👍👍👍very harsh reality
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    Asha garg
    05 മാര്‍ച്ച് 2020
    Superb explanation ✍️👍👍👍👍👍