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आहुति

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4.2

सारा धुआँ छट चुका था | सत्तर साल की गायत्री के जले हुए मृत शरीर की चिता की तैयारी चल रही थी | लोग कह रह रहे थे कि वह अपने पिछले जन्मों के पापों की आहुति देकर अब मुक्त हो गयी है | यह सब सुन कर जया के ...