pratilipi-logo प्रतिलिपि
हिन्दी

ahsas

4
506

बात चली है तो दूर तलक जाएगी  रूहानी सुबह गेसुओं में उलझी नजर आएगी  अलकों से झर रही निर्झर बून्द बून्द  लगता है अहसासों का फिर सैलाब लाएगी ........ ...

अभी पढ़ें
लेखक के बारे में

Clinical psychologist मुसाफ़िर........ अंतहीन सफ़र का मुझे जानने की कोशिश न करना, खुद को भूल जाओगे मेरी गुमनाम शख़्शियत में।। खुद से अनजान हूँ पर चेहरे पहचानती हूँ लफ़्ज़ों में लिपटी शख़्शियत को जानती हूँ। । मेरे रास्ते के देवदारों वादा है तुमसे एक दिन दरिया तुमसे होकर गुज़रेगी

समीक्षा
  • author
    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    Swati Amar
    12 मई 2020
    👌👌
  • author
    Sumedha Prakash
    04 अक्टूबर 2018
    सुंदर पर छोटी रचना
  • author
    29 सितम्बर 2019
    अतिसुंदर प्रस्तुति बधाई हो जय माता दी कृपया स्नेह स्वरूप मेरी रचना श्रीदुर्गाचरितमानस पढ़ने का कष्ट करे समीक्षा की प्रतीक्षा रहेगी जय माता दी आभार
  • author
    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    Swati Amar
    12 मई 2020
    👌👌
  • author
    Sumedha Prakash
    04 अक्टूबर 2018
    सुंदर पर छोटी रचना
  • author
    29 सितम्बर 2019
    अतिसुंदर प्रस्तुति बधाई हो जय माता दी कृपया स्नेह स्वरूप मेरी रचना श्रीदुर्गाचरितमानस पढ़ने का कष्ट करे समीक्षा की प्रतीक्षा रहेगी जय माता दी आभार