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अहसास

4.5
21721

गर्मी की आलस भरी दोपहर थी .भोजन के बाद रश्मि जब लेटी तो आँखों में नींद भर आई .अचानक मीठी नींद के बीच उसे ‘फटाक’ जैसी एक जोर की आवाज सुनाई पड़ी उसने बरबस आँखें खोल कर देखा तो पाया कि तिनके लाता ...

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लेखक के बारे में
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जया गोस्वामी

                                                           जया गोस्वामी जन्म- जयपुर, 1939. शिक्षा – ·       राजस्थान विश्वविद्यालय से एम.ए. (संस्कृत एवं समाजशास्त्र विषयों में) ·       ‘वैदिक सौर देवता’ विषय पर शोधकार्य. ·       जे.जे स्कूल ऑफ आर्ट्स से ‘बॉम्बे इंटरआर्ट.’डिप्लोमा ·       हिंदी साहित्य का अध्ययन एवं पंजाब विश्यविद्यालय से प्रभाकर. .       देश की विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में लेख, व्यंग्य, कविता, ग़ज़ल, गीत आदि का प्रकाशन  एवं सतत स्फुट लेखन. ·       आकाशवाणी से हिंदी, संस्कृत-विषयों में वार्ताओं का प्रसारण प्रकाशन : ·       ‘अभी कुछ दिन लगेंगे’ – ग़ज़ल संग्रह ·       ‘पास तक फ़ासले’ - ग़ज़ल संग्रह ·       ‘ये प्रवासी स्वप्न मेरे’ - गीत संग्रह ·       ‘हम खग टूटी पाँखों के’ – गीत संग्रह ·       एक व्यंग्य संग्रह प्रकाशनाधीन ·       चित्रकला और क्राफ्ट में अभिरुचि एवं ‘शिल्पांकन’ नामक एक नयी शैली का प्रवर्तन. ·       राजस्थान ललित कला अकादमी एवं सूचना केन्द्र के तहत एकल कला प्रदर्शनियां संपन्न. सम्मान- संस्कृत परिषद् रा.वि.वि., ‘भारती मंदिर’ साहित्य केन्द्र जयपुर एवं अनुराग साहित्य सेवा संस्थान आदि द्वारा. राजस्थान आवासन मंडल में ‘वरिष्ठ कार्मिक प्रबंधक पद से सेवा निवृत्त. निवास - मकान नंबर 206, पद्मावती कॉलोनी (प्रथम), किंग्स रोड, जयपुर-302019. संपर्क सूत्र - मोबाइल 9829539330. Email: [email protected]

समीक्षा
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  • कुल टिप्पणी
  • author
    Shrabonti Chakraborty
    09 ഏപ്രില്‍ 2019
    mandir ke baahar phikwa Dena.....asamvedanshilta ka Parichay! anuchedd ki gambheerta Ko dekhte huye ..yah line kuch phiki si ehsaas dilaati hai..
  • author
    durganarayan singh
    23 നവംബര്‍ 2018
    बेहद संवेदनशील रचना, लेखिका यदि गौरेया के जोडे़ मात्र चोटिल कर देती तो कहानी का मध्य भाग मार्मिक होने से बच सकता था।
  • author
    Vinay Sharma
    09 ഏപ്രില്‍ 2019
    Mandir ke bahar fikwa diya... kitni hridayhinta ka parichay deti pankti... Shayad isiliye santanhinta ku sthiti bilkul sahi he...
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    Shrabonti Chakraborty
    09 ഏപ്രില്‍ 2019
    mandir ke baahar phikwa Dena.....asamvedanshilta ka Parichay! anuchedd ki gambheerta Ko dekhte huye ..yah line kuch phiki si ehsaas dilaati hai..
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    durganarayan singh
    23 നവംബര്‍ 2018
    बेहद संवेदनशील रचना, लेखिका यदि गौरेया के जोडे़ मात्र चोटिल कर देती तो कहानी का मध्य भाग मार्मिक होने से बच सकता था।
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    Vinay Sharma
    09 ഏപ്രില്‍ 2019
    Mandir ke bahar fikwa diya... kitni hridayhinta ka parichay deti pankti... Shayad isiliye santanhinta ku sthiti bilkul sahi he...