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अहेसास दिल का

4.3
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जिक्र मेरा जब किसी और के लफ्जों में आएगा बेवजह तेरी आँखों में आंसू उमड़ आएगा, चाह का भी मुझे न अपना पाओगे दिल ही दिल में तुम बहुत पछताओगे, जितनी बेरुखी किया है तुमने मुझसे कभी खामोस बैठोगे तो ...

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लेखक के बारे में

मुझे कविताएं लिखने का शौक बचपन से रहा है।मुझे कविताएं लिखने में बहुत ही आनंद आता है।बहुत सारी कवितायेँ अबतक अपनी डायरी में संजों चूका हूँ।अब धीरे धीरे उन्हें आपके सामने ला रहा हूँ। आपलोग अपना आशिर्बाद बनाये रखें ताकि मैं अपना कविता लिखना जारी रख सकु।अपने मन में उठने वाली हर कल्पना और और हर अहेसास को अल्फाज दे सकुं। आपलोगों का बहुत बहुत धन्यवाद!कृपया सभी लोगों से निवेदन है कि आप मेरी और रचनाएँ पढ़ने के लिए मुझे फॉलो करें।।

समीक्षा
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    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    20 सितम्बर 2021
    लफ्ज़ आपके पर दास्तानें दिल अपना सा लगता है । उसकी बेवफाई का फ़साना अपना सा लगता है । दर्द-ए-दिल सभी की एक सी ही है शायद । क्यों मुझे तेरा तराना अपना सा लगता है ?
  • author
    Deepakk Satya "Mr.D"
    28 दिसम्बर 2019
    👌👍
  • author
    विनीता मिश्रा
    26 अक्टूबर 2019
    बहुत सुंदर
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    20 सितम्बर 2021
    लफ्ज़ आपके पर दास्तानें दिल अपना सा लगता है । उसकी बेवफाई का फ़साना अपना सा लगता है । दर्द-ए-दिल सभी की एक सी ही है शायद । क्यों मुझे तेरा तराना अपना सा लगता है ?
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    Deepakk Satya "Mr.D"
    28 दिसम्बर 2019
    👌👍
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    विनीता मिश्रा
    26 अक्टूबर 2019
    बहुत सुंदर