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अहंकार का खारापन

4.3
530

कितने अहसान फरामोश हैं हम, कितने विश्वास्घाती हैं हम कि जिससे हमें सब कुछ मिला है, वक़्त आने पर उसे ही दगा देते है हम । पर भूल जाते है कि हमारा यह आचरण कभी कभी हमें प्रायश्चित का भी अवसर नही देता ...

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लेखक के बारे में
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गोपालजी Gopalji
समीक्षा
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    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    Manjit Singh
    01 जुलाई 2020
    sach hai .ahankar to bhagwan bhi pasand nahi karte
  • author
    R H "HiR"
    30 सितम्बर 2023
    बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति
  • author
    SHEFALI GAURANGI
    05 दिसम्बर 2019
    सुंदर रचना है
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    Manjit Singh
    01 जुलाई 2020
    sach hai .ahankar to bhagwan bhi pasand nahi karte
  • author
    R H "HiR"
    30 सितम्बर 2023
    बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति
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    SHEFALI GAURANGI
    05 दिसम्बर 2019
    सुंदर रचना है