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ऐबो - हुनर न पूछो तुम, आदमी में क्‍या है

4.5
247

ऐबो-हुनर न पूछो तुम, आदमी में क्‍या है तुम में भी कुछ-न-कुछ है प्‍यारे हमीं में क्‍या है दोनों हैं एक हमको, जाने-बला हमारी अफ़सुरदगी में क्‍या है, और ख़ुर्रमी में क्‍या है ख़ूब ढूँढ़ा ख़ूब देखा कुछ ...

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लेखक के बारे में

मूल नाम : अबु ज़फ़र सिराजुद्दीन महम्मद बहादुर शाह ज़फ़र उपनाम : बहादुर शाह ज़फ़र जन्म : 24 अक्टूबर 1775 देहावसान : 7 नवंबर 1862 भाषा : उर्दू विधाएँ : ग़ज़ल बहादुर शाह ज़फ़र मुग़ल साम्राज्य के अंतिम सम्राट थे, और साथ ही ये उर्दू के एक मशहूर शायर भी रहे हैं, इनकी लिखी अधिकतर रचनायें अभी उपलब्ध नहीं हैं और ये माना जाता है की वो अंग्रेज़ों के साथ विद्रोह के समय या तो नष्ट हो गयीं अथवा इधर उधर खो गयीं, लेकिन फिर भी इनकी कुछ रचनायें अभी भी प्रसिद्ध हैं। भारतियों को अंग्रेज़ों के खिलाफ एक-जूट करने के लिये लिखी गयी ये पंक्तियाँ अभी भी मशहूर हैं: "हिंदिओं में बू रहेगी जब तलक ईमान की। तख्त ए लंदन तक चलेगी तेग हिंदुस्तान की।।"

समीक्षा
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  • author
    Rabiathewriter
    08 जनवरी 2021
    great
  • author
    मल्हार
    03 जून 2020
    👌👌👌👌
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    Rabiathewriter
    08 जनवरी 2021
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    03 जून 2020
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