रत्नाकर ने घर आकर मोना से कहा दो साल हो गए गाँव जाना नहीं हुआ। माँ फोन पर बार- बार आने को कह रही है, मैं भी उनकी तबियत को लेकर चिंतित हूँ। विष्णु भइया है, कोई चिंता की बात होती तो यहाँ ले आये ...
हिंदी साहित्य जीवन की वास्तविकता दिखानेवाला दर्पण है ।हिंदीभाषी होने के कारण यह मुझे विशेष रूप से प्रिय है।लिखने-पढ़ने की अभिरुचि मुझे प्रतिलिपि के मंच पर ले आई है।छोटे से दिल में एक छोटी सी आशा रखती हूँ ----मानव हूँ इसी रूप में सदा पहचानी जाऊँ।
सारांश
हिंदी साहित्य जीवन की वास्तविकता दिखानेवाला दर्पण है ।हिंदीभाषी होने के कारण यह मुझे विशेष रूप से प्रिय है।लिखने-पढ़ने की अभिरुचि मुझे प्रतिलिपि के मंच पर ले आई है।छोटे से दिल में एक छोटी सी आशा रखती हूँ ----मानव हूँ इसी रूप में सदा पहचानी जाऊँ।
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