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अब्र बन कोई न आया देर तक

4.4
1218

अब्र बन कोई न आया देर तक धूप का तन्हा था साया देर तक दम मिरा उस दम निकलने को हुआ दूरियों ने जब सताया देर तक आँख मूँदे थे कहाँ सोये थे हम याद का पैकर जब आया देर तक आप से कुछ कह नहीं पाए मगर ख़ुद को...

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लेखक के बारे में
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रेणु मिश्रा
समीक्षा
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    06 ഒക്റ്റോബര്‍ 2025
    पाक सी मोहब्बत को पाने की, नापाक सी कोशिश करता हूँ, तुझे चाहता हूँ, मगर तंज-ए-ज़माने से डरता हूँ...!! ✍️✍️मेहकाफ़..
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    Komal
    01 ജൂലൈ 2025
    लाजवाब 👌👌 वक्त की धूप में अंगार सी झुलसती रही ज़िंदगी, . अब जनाजे पर मिरे ऐसा अब्र बरसा के बरसता ही रहा...
  • author
    15 ഏപ്രില്‍ 2026
    तन्हाई बि अपना साथी समझ लेना मेरे दोस्त, वरना इश्क के धोखे तो छोड़े सबको, और छेड़े सबको
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    06 ഒക്റ്റോബര്‍ 2025
    पाक सी मोहब्बत को पाने की, नापाक सी कोशिश करता हूँ, तुझे चाहता हूँ, मगर तंज-ए-ज़माने से डरता हूँ...!! ✍️✍️मेहकाफ़..
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    Komal
    01 ജൂലൈ 2025
    लाजवाब 👌👌 वक्त की धूप में अंगार सी झुलसती रही ज़िंदगी, . अब जनाजे पर मिरे ऐसा अब्र बरसा के बरसता ही रहा...
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    15 ഏപ്രില്‍ 2026
    तन्हाई बि अपना साथी समझ लेना मेरे दोस्त, वरना इश्क के धोखे तो छोड़े सबको, और छेड़े सबको