pratilipi-logo प्रतिलिपि
हिन्दी

अब्र बन कोई न आया देर तक

4.4
1223

अब्र बन कोई न आया देर तक धूप का तन्हा था साया देर तक दम मिरा उस दम निकलने को हुआ दूरियों ने जब सताया देर तक आँख मूँदे थे कहाँ सोये थे हम याद का पैकर जब आया देर तक आप से कुछ कह नहीं पाए मगर ख़ुद को...

अभी पढ़ें
लेखक के बारे में
author
रेणु मिश्रा
समीक्षा
  • author
    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    06 అక్టోబరు 2025
    पाक सी मोहब्बत को पाने की, नापाक सी कोशिश करता हूँ, तुझे चाहता हूँ, मगर तंज-ए-ज़माने से डरता हूँ...!! ✍️✍️मेहकाफ़..
  • author
    Komal
    01 జులై 2025
    लाजवाब 👌👌 वक्त की धूप में अंगार सी झुलसती रही ज़िंदगी, . अब जनाजे पर मिरे ऐसा अब्र बरसा के बरसता ही रहा...
  • author
    15 ఏప్రిల్ 2026
    तन्हाई बि अपना साथी समझ लेना मेरे दोस्त, वरना इश्क के धोखे तो छोड़े सबको, और छेड़े सबको
  • author
    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    06 అక్టోబరు 2025
    पाक सी मोहब्बत को पाने की, नापाक सी कोशिश करता हूँ, तुझे चाहता हूँ, मगर तंज-ए-ज़माने से डरता हूँ...!! ✍️✍️मेहकाफ़..
  • author
    Komal
    01 జులై 2025
    लाजवाब 👌👌 वक्त की धूप में अंगार सी झुलसती रही ज़िंदगी, . अब जनाजे पर मिरे ऐसा अब्र बरसा के बरसता ही रहा...
  • author
    15 ఏప్రిల్ 2026
    तन्हाई बि अपना साथी समझ लेना मेरे दोस्त, वरना इश्क के धोखे तो छोड़े सबको, और छेड़े सबको