तुम्हारी आँखों में भी मुझे नजर आने लगी हैं तुम्हारे हिस्से कीसुनहरी धूप मेरे मन के कोने भी चमकाने लगी हैं रिक्त'ता शून्यता अकेलापन जैसे दुबके हैं किसी छोर पर तुम्हारे होने में मेरे होने के मायने जैसे...
नीलिमा शर्मा
कोई ख़ुशबू उदास करती है कहानी संग्रह की लेखिका ,मुट्ठी भर अक्षर,खुसरो दरिया प्रेम का , आईना सच नही बोलता हाशिये का हक़ ,मूड्स ऑफ लॉक डाउन , लुका छिपी, मृगतृष्णा की संपादक ओर लेखक
सारांश
नीलिमा शर्मा
कोई ख़ुशबू उदास करती है कहानी संग्रह की लेखिका ,मुट्ठी भर अक्षर,खुसरो दरिया प्रेम का , आईना सच नही बोलता हाशिये का हक़ ,मूड्स ऑफ लॉक डाउन , लुका छिपी, मृगतृष्णा की संपादक ओर लेखक
रिपोर्ट की समस्या
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