ये दुनिया बाज़ार
इश्क़ दुकान
प्रेम व्यापार
हमेशा से।
बिक रही
सजी हुई देहें
और आतिशें
चन्द ख्वाब
रिश्ते
दरोदीवार
और आसमान...
लेकिन अब
दौर बदला है।
सुनो!
आज
कतारबद्ध तुम खड़े
बिकाऊ
चाहत के
सिक्के मेरे ...
स्त्री को सिर्फ़ देह और भोग्या मानने वाले पुरुष ने उसे बिकाऊ माल समझकर तरह-तरह से शोषित-उत्पीड़ित किया है. प्रस्तुत रचना पुरुष की इसी प्रवृत्ति का प्रखरता से विरोध करती है. आज की स्त्री में वह साहस है, और उसके पास वे साधन भी हैं कि वह पुरुष को ख़रीद सकती है, नीलाम कर सकती है. सरल शब्दों में सघन भाव अभिव्यक्त करती उत्तम कृति. हार्दिक बधाई
रिपोर्ट की समस्या
सुपरफैन
अपने प्रिय लेखक को सब्सक्राइब करें और सुपरफैन बनें !
स्त्री को सिर्फ़ देह और भोग्या मानने वाले पुरुष ने उसे बिकाऊ माल समझकर तरह-तरह से शोषित-उत्पीड़ित किया है. प्रस्तुत रचना पुरुष की इसी प्रवृत्ति का प्रखरता से विरोध करती है. आज की स्त्री में वह साहस है, और उसके पास वे साधन भी हैं कि वह पुरुष को ख़रीद सकती है, नीलाम कर सकती है. सरल शब्दों में सघन भाव अभिव्यक्त करती उत्तम कृति. हार्दिक बधाई
रिपोर्ट की समस्या
सुपरफैन
अपने प्रिय लेखक को सब्सक्राइब करें और सुपरफैन बनें !
रिपोर्ट की समस्या
रिपोर्ट की समस्या
रिपोर्ट की समस्या