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आतंकवादी

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धर्म से जुड़ा, न सगा है किसी का। विकृत मानसिकता, लछण है उसीका। हिंसा का पुतला, खौफ का जनक है। हरुं प्राण सबके, ऐसी सनक है। नहीं सोच खुदकी, वो तो बरगलाया है। मिलेगी जन्नत, हूरौं का साया है। कोढ़ है ...

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लेखक के बारे में
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kuldeep singh
समीक्षा
  • author
    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    Sandeep Sahu
    27 अप्रैल 2019
    💐👌💐👌
  • author
    Kavi Sonu Meena
    13 अप्रैल 2020
    wah wah wah Bahut khoob
  • author
    31 जुलाई 2019
    nice ji
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  • कुल टिप्पणी
  • author
    Sandeep Sahu
    27 अप्रैल 2019
    💐👌💐👌
  • author
    Kavi Sonu Meena
    13 अप्रैल 2020
    wah wah wah Bahut khoob
  • author
    31 जुलाई 2019
    nice ji