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आसमान में चाँद और मैं

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ऐ  चांद,  जाकर  कह  दे.... तुझे  बनाने  वाले ‌को, कि  मुझे   शामिल  कर  दे तेरी  चांदनी  में, खिड़की से झांकती हूं तो तेरी शीतलता में खो जाती हूं, मेरे जज़्बात जुड़ चुके हैं तुमसे पूनम को तो ...

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लेखक के बारे में
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Lakshmi Ahirwar

मैं आसमान को देखकर साहस बटोरा करती हूं, दुख को अमृत समझ कर पी लिया करती हूं।

समीक्षा
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  • author
    Roshani Patel "સંસ્કૃતિ"
    14 मई 2021
    very nice 👌👌👌👌👌💐💐💐💐
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    Roshani Patel "સંસ્કૃતિ"
    14 मई 2021
    very nice 👌👌👌👌👌💐💐💐💐