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आशियाना

4.3
187

आशियाना मिट्टी का धुल बन उड़ गया रह गये अब वो निशा जिसमे संसार मेरा सिमट गया, ढेर ये मिट्टी का बिखरा है यहाँ -वहां हर कोई ले जाना चाहे बनाये इससे अपना आशियां, कहते-कहते तक सा गया हूँ ना ले जाओ मिटी ...

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लेखक के बारे में
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Sumit Singh

My name is Sumit Singh from Jaipur, Rajasthan. i am a engnieering student .

समीक्षा
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  • कुल टिप्पणी
  • author
    शुभम पंथ
    04 फ़रवरी 2018
    दुआ है कि आपका भी आशियाना बस जाए
  • author
    कुमार अभिनंदन
    29 फ़रवरी 2020
    अच्छा है
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    शुभम पंथ
    04 फ़रवरी 2018
    दुआ है कि आपका भी आशियाना बस जाए
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    कुमार अभिनंदन
    29 फ़रवरी 2020
    अच्छा है