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आओ हमारे पास भी

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नीर कण उर में संजो, संग पवन मेघ डोलते आवारा मन की मस्ती में एक पल कहीं न ठहरते दामिनी भी साथ हिल-मिल नृत्य करती दमकती व्याकुल गगन गरजा तभी, मत जाओ, ठहरो तुम अभी स्वप्न के संसार में इच्छाओं का ...

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लेखक के बारे में
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कुसुम वीर
समीक्षा
  • author
    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    Manjit Singh
    23 मार्च 2021
    भाषा शैली अति उत्तम है,प्रकृति का खूब वर्णन है,पथिक की प्यास है,,,,,,,,,आपको कोटी कोटि प्रणाम
  • author
    Krishna Shukla
    18 सितम्बर 2019
    n
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    Manjit Singh
    23 मार्च 2021
    भाषा शैली अति उत्तम है,प्रकृति का खूब वर्णन है,पथिक की प्यास है,,,,,,,,,आपको कोटी कोटि प्रणाम
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    Krishna Shukla
    18 सितम्बर 2019
    n