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छलका नयन , गिर पड़ा एक बूँद अरे! इसेमत नीर समझो | इसमेंछिपी है वेदना अंतः कलह, छिन्न सपने , शत्रु अपने ठोकरों का क्रोध इसमें, जो मिली थी बेवजह | इसमें छिपा है – भेद रंग का जाति का , सर्द आहें !...