बहुत दिनों के बाद
जब झांक कर देखा
खिडकी से
तो नजर आया
कि पडोसी का
बोगन वेलिया
दीवारें फांदकर
हमारी मधुमालती से
आँखे चार कर रहा है बहुत दिनों के बाद
बाड के पार देखा तो
पाया कि
चौकीदार के
पाले हुए...
लाजवाब कविता है। बोगनबेलिया का मधुमालती से आंखें चार करना बहुत सुंदर नया बिम्ब है। और अंत में डाकिए नहीं भूला करते घर के पते कविता को अद्भुत सौंदर्य प्रदान करता है।
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लाजवाब कविता है। बोगनबेलिया का मधुमालती से आंखें चार करना बहुत सुंदर नया बिम्ब है। और अंत में डाकिए नहीं भूला करते घर के पते कविता को अद्भुत सौंदर्य प्रदान करता है।
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