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आँखे चार करता बोगन वेलिया

3.8
311

बहुत दिनों के बाद जब झांक कर देखा खिडकी से तो नजर आया कि पडोसी का बोगन वेलिया दीवारें फांदकर हमारी मधुमालती से आँखे चार कर रहा है बहुत दिनों के बाद बाड के पार देखा तो पाया कि चौकीदार के पाले हुए...

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लेखक के बारे में
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अंजनी शर्मा
समीक्षा
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  • कुल टिप्पणी
  • author
    11 ಅಕ್ಟೋಬರ್ 2015
    लाजवाब कविता है। बोगनबेलिया का मधुमालती से आंखें चार करना बहुत सुंदर नया बिम्ब है। और अंत में डाकिए नहीं भूला करते घर के पते कविता को अद्भुत सौंदर्य प्रदान करता है।  
  • author
    Satyendra Kumar Upadhyay
    25 ಅಕ್ಟೋಬರ್ 2015
    खिडकी , पडोसी जैसे शब्द मात्रा अभाव दर्शाते हैं । राष्ट्र भाषा का पूर्ण अनुसरण न करती एक अत्यंत सारहीन व अप्रासांगिक कविता ।
  • author
    08 ಜುಲೈ 2021
    आधुनिक जीवन शैली पर प्रत्यक्ष आघात किया है। व्यंग के माध्यम से टीन ट्रुथ की लक्षणा है
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    11 ಅಕ್ಟೋಬರ್ 2015
    लाजवाब कविता है। बोगनबेलिया का मधुमालती से आंखें चार करना बहुत सुंदर नया बिम्ब है। और अंत में डाकिए नहीं भूला करते घर के पते कविता को अद्भुत सौंदर्य प्रदान करता है।  
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    Satyendra Kumar Upadhyay
    25 ಅಕ್ಟೋಬರ್ 2015
    खिडकी , पडोसी जैसे शब्द मात्रा अभाव दर्शाते हैं । राष्ट्र भाषा का पूर्ण अनुसरण न करती एक अत्यंत सारहीन व अप्रासांगिक कविता ।
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    08 ಜುಲೈ 2021
    आधुनिक जीवन शैली पर प्रत्यक्ष आघात किया है। व्यंग के माध्यम से टीन ट्रुथ की लक्षणा है