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आकांक्षा

4.9
285

ओ मेरी लाड़ली बिटिया अब तुझे जन्म देने में न तो डरती हूँ न ही बचती हूँ बस यह चाहती हूँ लगा सकूं काला टीका तेरे उजले भाल पर जो बचा सके कुदृष्टि से दुनिया वालों की जला सकूं एक दीप घर की देहरी पर जो ...

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लेखक के बारे में
समीक्षा
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    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    अरविन्द सिन्हा
    15 फ़रवरी 2022
    अत्यन्त ही सुन्दर अभिव्यक्ति ।
  • author
    Joginder Kaur
    13 जुलाई 2022
    बेहतरीन रचना है
  • author
    05 जनवरी 2019
    अप्रतिम सुन्दर
  • author
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    अरविन्द सिन्हा
    15 फ़रवरी 2022
    अत्यन्त ही सुन्दर अभिव्यक्ति ।
  • author
    Joginder Kaur
    13 जुलाई 2022
    बेहतरीन रचना है
  • author
    05 जनवरी 2019
    अप्रतिम सुन्दर