आज पुरानी डायरी मे बेशुमार प्यार पढ़ा …… बीते लम्हों मे भरा एतबार पढ़ा हँसी और आंसुओं का सैलाब पढ़ा आज पुरानी डायरी मे बेशुमार प्यार पढ़ा …… खुद के लिए तुम्हारी फ़िक्र तुम्हारा ख्याल पढ़ा भुखी दुपहर को ...
अतीत के चलचित्र डायरी में ही चलते फिरते रहते हैं, पर जब हम डायरी के पन्नों को पलटते है तो चलचित्र की तरह हमारी यादें जमी परतो को खोलते इस चलचित्र के साथ दौड़ने लगती है--
मन में जमी परतों को खोलती और प्रेम को जिन्दा रखने की नसीहत देती बेहद खुबसूरत रचना--
बहुत सुंदर
बधाई
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अतीत के चलचित्र डायरी में ही चलते फिरते रहते हैं, पर जब हम डायरी के पन्नों को पलटते है तो चलचित्र की तरह हमारी यादें जमी परतो को खोलते इस चलचित्र के साथ दौड़ने लगती है--
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