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आज पुरानी डायरी मे बेशुमार प्यार पढ़ा …

4.4
986

आज पुरानी डायरी मे बेशुमार प्यार पढ़ा …… बीते लम्हों मे भरा एतबार पढ़ा हँसी और आंसुओं का सैलाब पढ़ा आज पुरानी डायरी मे बेशुमार प्यार पढ़ा …… खुद के लिए तुम्हारी फ़िक्र तुम्हारा ख्याल पढ़ा भुखी दुपहर को ...

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लेखक के बारे में
समीक्षा
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    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    Upendra Sharma
    14 अक्टूबर 2015
    वाह रेवा जी शब्दों को पीरो कर जो रचना आपने की है वो अतुलनिय है रचना पेश करते रहें  
  • author
    Anand Budhia
    14 अक्टूबर 2015
    Awesome thoughts and poem on nostalgic memories to cherish our heart 
  • author
    ज्योति खरे
    15 अक्टूबर 2015
    अतीत के चलचित्र डायरी में ही चलते फिरते रहते हैं, पर जब हम डायरी के पन्नों को पलटते है तो चलचित्र की तरह हमारी यादें जमी परतो को खोलते इस चलचित्र के साथ दौड़ने लगती है-- मन में जमी परतों को खोलती और प्रेम को जिन्दा रखने की नसीहत देती बेहद खुबसूरत रचना-- बहुत सुंदर  बधाई 
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    Upendra Sharma
    14 अक्टूबर 2015
    वाह रेवा जी शब्दों को पीरो कर जो रचना आपने की है वो अतुलनिय है रचना पेश करते रहें  
  • author
    Anand Budhia
    14 अक्टूबर 2015
    Awesome thoughts and poem on nostalgic memories to cherish our heart 
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    ज्योति खरे
    15 अक्टूबर 2015
    अतीत के चलचित्र डायरी में ही चलते फिरते रहते हैं, पर जब हम डायरी के पन्नों को पलटते है तो चलचित्र की तरह हमारी यादें जमी परतो को खोलते इस चलचित्र के साथ दौड़ने लगती है-- मन में जमी परतों को खोलती और प्रेम को जिन्दा रखने की नसीहत देती बेहद खुबसूरत रचना-- बहुत सुंदर  बधाई