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आज माँ हाेती ताे

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आज माँ हाेती ताे दुँख मेरा जान लेती , बिन बाेले ही वाे मेरे चेहरे से पहचान लेती , देती थी दिलाया वाे मुझे दूर रह कर भी , शक्ति मिलती थी मुझे उसकी बाताे से ,कभी , कैसे चलना है इस संसार मे बताती थी वाे ...

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लेखक के बारे में
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विमल गांधी
समीक्षा
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    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    Dr Pratibha Saxena
    14 अक्टूबर 2018
    मां तो मां ही होती है ,उसकी कमी तो कोई भी दूर नहीं कर सकता है.
  • author
    Sumedha Prakash
    09 अक्टूबर 2018
    मां को महसूस करती कविता
  • author
    bhawna verma
    27 मार्च 2020
    माँ तो माँ है
  • author
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  • कुल टिप्पणी
  • author
    Dr Pratibha Saxena
    14 अक्टूबर 2018
    मां तो मां ही होती है ,उसकी कमी तो कोई भी दूर नहीं कर सकता है.
  • author
    Sumedha Prakash
    09 अक्टूबर 2018
    मां को महसूस करती कविता
  • author
    bhawna verma
    27 मार्च 2020
    माँ तो माँ है