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हिन्दी

आईना

4.2
748

नहीं पसन्द हैं मुझे आईनें ना ही दिखना आईने में मैं खुद ही निर्मिति हूँ अपनी खुद को देखता हूँ खुद में दुनिया के निर्मित आईनों में नहीं समाता वजूद मेरा नाही समाना चाहता हूँ मैं मैंने खुद ही गढ़ा ...

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लेखक के बारे में

डॉ अनुराधा शर्मा -- शिक्षा  - हिन्दी व इतिहास में एम.ए. , बी. एड. ,           एम.एड. ,पीएच.डी. , संगीत प्रभाकर ( गायन ) पुरस्कार व सम्मान-- दिल्ली शिक्षा निदेशालय की और से 'प्रतिभांजलि पुरस्कार' (२००५से २००८तक) ,  तथा सर्वश्रेष्ठ राज्य शिक्षक पुरस्कार (२०११) अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर आगमन समुह द्वारा 'तेजस्विनी अवॉर्ड '( २०१७) प्रकाशन - कईं पुस्तकें ,कईं साझा संग्रह में रचनाएँ प्रकाशित तथा अन्य पत्र पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित, ऑनलाइन प्रकाशन--  अनेक रचनाएँ प्रकाशित अनेक सेमिनार में भागीदारी के साथ अनेक बार शैक्षिक सेमिनार्स में रिसॉर्स पर्सन । अन्तर्राष्ट्रीय फिल्म फैस्टिवल दिल्ली ( २०११)में कला प्रदर्शनी में भागीदारी, वर्तमान में जुलाई २०२१ से वित्त मंत्रालय,दिल्ली में एकल कला प्रदर्शनी लगी है तीन महीने के लिए। एक एनजीओ का संचालन। सम्प्रति- उपप्रधानाचार्या- दिल्ली शिक्षा निदेशालय ।

समीक्षा
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  • कुल टिप्पणी
  • author
    Naveen Pawar
    22 ജനുവരി 2022
    आदरणीया महोदया जी आपकी कवितावली बहुत खुबसुरत होती है उपयुक्तता लफ्ज दिल की गहराई मे अमिट छाप छोड जाते है
  • author
    20 ഏപ്രില്‍ 2020
    बहुत खूब रचा है आपने ।
  • author
    renu kapoor very innovative
    30 ആഗസ്റ്റ്‌ 2022
    bhaaut sunder
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    Naveen Pawar
    22 ജനുവരി 2022
    आदरणीया महोदया जी आपकी कवितावली बहुत खुबसुरत होती है उपयुक्तता लफ्ज दिल की गहराई मे अमिट छाप छोड जाते है
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    20 ഏപ്രില്‍ 2020
    बहुत खूब रचा है आपने ।
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    renu kapoor very innovative
    30 ആഗസ്റ്റ്‌ 2022
    bhaaut sunder