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आदत

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तुम ही मेरी आदत बने थे तुम ही मेरी आदत रहना तुमसे पहले किसी को जाना नहीं था तुमसे पहले किसी को इतना समझा नहीं था एक प्यारी सी बात थी तेरी सब बातों में एक अलग ही एहसास जगा था तेरी बातों से मेरी...

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लेखक के बारे में
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Meena (Sumi) Rawlani

क्यों तुम पहचान कर भी अनजान बने रहते हो दोस्ती का मुखौटा पहनकर दुश्मनों सा व्यवहार करने लगते हो ll शायद यही होती है दोस्ती ऐसी कहलाती है दोस्ती पहले दोस्त बनाते हो फिर दुश्मन बनकर पीठ में खंजर घोपने लगते हो l Sumi

समीक्षा
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    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    Pappi Jat
    29 जून 2021
    वाह जी वाह लाजवाब लिखा है पर मझधार में डुबो मत देना दुनिया कि बातों में गोली मत मार देना। ।
  • author
    Banni Sidhu
    29 जून 2021
    bhut khub likhya ji👌👌👌
  • author
    🦋Shelly mandal 🦋.....
    29 जून 2021
    bahat khub 👌👌
  • author
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  • author
    Pappi Jat
    29 जून 2021
    वाह जी वाह लाजवाब लिखा है पर मझधार में डुबो मत देना दुनिया कि बातों में गोली मत मार देना। ।
  • author
    Banni Sidhu
    29 जून 2021
    bhut khub likhya ji👌👌👌
  • author
    🦋Shelly mandal 🦋.....
    29 जून 2021
    bahat khub 👌👌