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एक कविता मेरी भी

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कई राज़ मेरी आँखों मे कई बातें मेरी बातों में कई अल्फ़ाज़ मेरे लफ़्ज़ों में कोई तो हो जिसे कह सकूँ की वो ही बस कुछ खास सा है मेरे आसपास रहने वालों में की उसे पता होगा जो है मुझमें की उसकी आँखें वो देखेगी ...

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लेखक के बारे में
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Shilpi Verma

मुख़्तसर सा गुरूर भी जरूरी है जीने के लिए ज्यादा झुक के मिलो तो दुनिया अक्सर पीठ को पायदान बना देती है

समीक्षा
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    Jainand Gurjar
    18 অক্টোবর 2019
    ji bohot hi accha likha hai aapne. kripya meri kahani "aakhir bhul kyo jaate hai log" bhi padkar bataye ki wo aapko kaise lagi.
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    Jainand Gurjar
    18 অক্টোবর 2019
    ji bohot hi accha likha hai aapne. kripya meri kahani "aakhir bhul kyo jaate hai log" bhi padkar bataye ki wo aapko kaise lagi.