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105 तन और मन

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आध्यात्मिक चिंतन

हार मत मानना, हार पहना कर ही मानना

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लेखक के बारे में
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Lokeshanand Paramhans

अ दुनिया के थके माँदे लोगों आओ मेरे पास मैंने वो स्थान ढूंढ लिया है जहाँ दुख नहीं है।

समीक्षा
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    बस यही विडंबना है तन ओर मन की जो चाहे जींस दिशा में घूमाऔ सफल या विफल । जय श्रीराम जय श्रीराम जय श्रीराम जय श्रीराम जय श्रीराम जय श्रीराम जय श्रीराम जय श्रीराम जय श्रीराम जय श्रीराम जय श्रीराम जय श्रीराम जय श्रीराम जय श्रीराम
  • author
    Neha Vyas
    13 सितम्बर 2021
    सादर प्रणाम 🙏🙏 प्रेरक 🙏🙏
  • author
    ashok
    12 सितम्बर 2019
    अति सुन्दर
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    बस यही विडंबना है तन ओर मन की जो चाहे जींस दिशा में घूमाऔ सफल या विफल । जय श्रीराम जय श्रीराम जय श्रीराम जय श्रीराम जय श्रीराम जय श्रीराम जय श्रीराम जय श्रीराम जय श्रीराम जय श्रीराम जय श्रीराम जय श्रीराम जय श्रीराम जय श्रीराम
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    Neha Vyas
    13 सितम्बर 2021
    सादर प्रणाम 🙏🙏 प्रेरक 🙏🙏
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    ashok
    12 सितम्बर 2019
    अति सुन्दर