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लालच का अंत

4.7
144

एक धनवान व्यक्ति था जिसका नाम सुदर्शन था उसका लकड़ियों का बहुत बड़ा व्यापार था । उसने धीरे धीरे विदेशो में भी अपना व्यापार बड़ा लिया और निरंतर लाभ होने से लखपति से करोड़पति बन गया । देश विदेश में सुदर्शन ...

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लेखक के बारे में
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sakshi Jain

उम्मीदों पर खरा उतरु बिना किसी उम्मीद के।

समीक्षा
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  • कुल टिप्पणी
  • author
    25 सितम्बर 2019
    अतिसुंदर प्रस्तुति।।।। कृपया स्नेह स्वरूप मेरी रचना उल्टी गंगा बदलता परिवेश पढ़ने का कष्ट करे सहृदय धन्यवाद समीक्षा की प्रतीक्षा रहेगी जय माता दी।
  • author
    19 सितम्बर 2019
    सच कहा जैन जी लालच का अंत बुरा ही होता है।
  • author
    Ali Akbar
    19 सितम्बर 2019
    u narrated it in few words कमाल है
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    25 सितम्बर 2019
    अतिसुंदर प्रस्तुति।।।। कृपया स्नेह स्वरूप मेरी रचना उल्टी गंगा बदलता परिवेश पढ़ने का कष्ट करे सहृदय धन्यवाद समीक्षा की प्रतीक्षा रहेगी जय माता दी।
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    19 सितम्बर 2019
    सच कहा जैन जी लालच का अंत बुरा ही होता है।
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    Ali Akbar
    19 सितम्बर 2019
    u narrated it in few words कमाल है