pratilipi-logo प्रतिलिपि
हिन्दी

मिलन

4.9
354

रात के सवा नौ बजे थे। बाहर तेज़ बारिश हो रही थी। बीच - बीच में बिजली कड़कने की आवाज़ आती तो पूरे घर की खिड़कियाँ दूधिया रोशनी से नहा जातीं। रीना अपने ही ख्यालों में गुम किचन के बेसिन में पड़ी जूठी ...

अभी पढ़ें
लेखक के बारे में
author
श्रेया
समीक्षा
  • author
    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    kanhaiya khatri (. K. K .)
    18 ജനുവരി 2025
    वाह लाजवाब 👌👌👌👌
  • author
    sonal sharma
    01 ആഗസ്റ്റ്‌ 2022
    👌👌
  • author
    Shankar Rajalwal
    10 നവംബര്‍ 2025
    बरखा रानी जरा जम के बरसो मेरा दिलवर जा न पाए झूम के बरसो हैप्पी एंडिंग भी हो सकता था बेहतरीन होता धन्यवाद
  • author
    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    kanhaiya khatri (. K. K .)
    18 ജനുവരി 2025
    वाह लाजवाब 👌👌👌👌
  • author
    sonal sharma
    01 ആഗസ്റ്റ്‌ 2022
    👌👌
  • author
    Shankar Rajalwal
    10 നവംബര്‍ 2025
    बरखा रानी जरा जम के बरसो मेरा दिलवर जा न पाए झूम के बरसो हैप्पी एंडिंग भी हो सकता था बेहतरीन होता धन्यवाद