‘फूल खिलें हैं गुलशन-गुलशन’, ये मुहावरा शायद अब पुराना हो चला है क्योंकि गुलशन (बाग़) तो अब बस गिने चुने ही रह गए है. जहाँ देखो वहां कंक्रीट के जंगल ही दिखाई देते है. हाँ कहीं कहीं बनावटी फुलों ...
‘फूल खिलें हैं गुलशन-गुलशन’, ये मुहावरा शायद अब पुराना हो चला है क्योंकि गुलशन (बाग़) तो अब बस गिने चुने ही रह गए है. जहाँ देखो वहां कंक्रीट के जंगल ही दिखाई देते है. हाँ कहीं कहीं बनावटी फुलों ...