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दो कमरे

4.4
50156

"अगर तुम माँ को इतना मिस करते हो तो उनसे मिलने चले जाओ या उन्हें ही यहाँ बुला लो न "- मैंने कहा। रमन लेटे हुए छत ताकते हुए बोले - "माँ यहाँ नहीं आयेंगीं। जो आराम माँ को भैय्या के घर में है यहाँ इस ...

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लेखक के बारे में
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Deepa Dingolia

स्वतंत्र रूप से पत्र-पत्रिकाओं के लिए कविता,कहानी,लेख-आलेख लिखती हूँ | राष्ट्रीय व अन्तर्राष्ट्रीय समाचार -पत्र व हिंदी पत्रिकाओं में आलेख,कहानी,कविता व लेख प्रकाशित।अपनी ब्लॉग https://deepadingolia.blogspot.com तथा Face Book Page-https://www.facebook.com/स्याह-मोती-उजले-पन्नों-पर-103695051285381/?ref=nf के माध्यम से अपने विचार व्यक्त करती हूँ।

समीक्षा
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    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    31 जनवरी 2019
    बहुत अच्छी कहानी। पर इस कहानी की हीरो उस आदमी की वाइफ है जो अपनी सास को अपने पास रखने के लिए कह रही है। नही तो आजकल बहुत कम लडकिया है जो ऐसा करती ह
  • author
    Kamlesh Patni
    07 जनवरी 2019
    बहुत सुंदर कहानी।माँ तो प्यार और मान सम्मान की भूखी होती है।धन दौलत की नहीं।बच्चों की अमीरी गरीबी से उन्हें कष्ट नहीं होता कष्ट होता है तिरस्कार और अपमान से।
  • author
    Ranjana Jain
    04 मार्च 2019
    vary nice story
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    31 जनवरी 2019
    बहुत अच्छी कहानी। पर इस कहानी की हीरो उस आदमी की वाइफ है जो अपनी सास को अपने पास रखने के लिए कह रही है। नही तो आजकल बहुत कम लडकिया है जो ऐसा करती ह
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    Kamlesh Patni
    07 जनवरी 2019
    बहुत सुंदर कहानी।माँ तो प्यार और मान सम्मान की भूखी होती है।धन दौलत की नहीं।बच्चों की अमीरी गरीबी से उन्हें कष्ट नहीं होता कष्ट होता है तिरस्कार और अपमान से।
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    Ranjana Jain
    04 मार्च 2019
    vary nice story