"अगर तुम माँ को इतना मिस करते हो तो उनसे मिलने चले जाओ या उन्हें ही यहाँ बुला लो न "- मैंने कहा। रमन लेटे हुए छत ताकते हुए बोले - "माँ यहाँ नहीं आयेंगीं। जो आराम माँ को भैय्या के घर में है यहाँ इस ...
स्वतंत्र रूप से पत्र-पत्रिकाओं के लिए कविता,कहानी,लेख-आलेख लिखती हूँ | राष्ट्रीय व अन्तर्राष्ट्रीय समाचार -पत्र व हिंदी पत्रिकाओं में आलेख,कहानी,कविता व लेख प्रकाशित।अपनी ब्लॉग https://deepadingolia.blogspot.com तथा Face Book Page-https://www.facebook.com/स्याह-मोती-उजले-पन्नों-पर-103695051285381/?ref=nf
के माध्यम से अपने विचार व्यक्त करती हूँ।
सारांश
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बहुत सुंदर कहानी।माँ तो प्यार और मान सम्मान की भूखी होती है।धन दौलत की नहीं।बच्चों की अमीरी गरीबी से उन्हें कष्ट नहीं होता कष्ट होता है तिरस्कार और अपमान से।
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बहुत सुंदर कहानी।माँ तो प्यार और मान सम्मान की भूखी होती है।धन दौलत की नहीं।बच्चों की अमीरी गरीबी से उन्हें कष्ट नहीं होता कष्ट होता है तिरस्कार और अपमान से।
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