pratilipi-logo प्रतिलिपि
हिन्दी

दिल की आवाज

4.4
17614

जज के प्रवेश करते ही पूरा सेशन कोर्ट में शांति छा गई. जज ने केस के पन्नो को पलटा. बचाव पक्ष का वकील नही है. अशोक ने कहा मुझे जरूरत नहीं है वकील की. तो क्या आप अपने लिए जिरह खुद करेंगें?

अभी पढ़ें
लेखक के बारे में
author
मनीषा गौतम
समीक्षा
  • author
    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    Vrunda H. Goud
    22 జనవరి 2019
    वाकई अकेली महिला को सहारा देने के नाम पर यही मंशा होती है। अकेली मां को इस बात का हमेशा ध्यान रखना चाहिए।
  • author
    Arunima Dinesh Thakur "अनु"
    01 అక్టోబరు 2018
    kash , samaj me ese murder allow hote.....
  • author
    Neelam Tyagi
    05 జనవరి 2019
    बहुत अच्छी रचना है अशोक ने बहुत आछा किया
  • author
    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    Vrunda H. Goud
    22 జనవరి 2019
    वाकई अकेली महिला को सहारा देने के नाम पर यही मंशा होती है। अकेली मां को इस बात का हमेशा ध्यान रखना चाहिए।
  • author
    Arunima Dinesh Thakur "अनु"
    01 అక్టోబరు 2018
    kash , samaj me ese murder allow hote.....
  • author
    Neelam Tyagi
    05 జనవరి 2019
    बहुत अच्छी रचना है अशोक ने बहुत आछा किया