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तन्हा जिंदगी

3.6
55015

""मुझे नहीं पता कि उस रात मेरे वहाँ से जाने के बाद तुम्हारे साथ क्या हुआ., मुझे माफ़ कर दो दिव्या " यही तो कहा था आपने और फिर चुप हो गए थे आप। जानती हूं आपके अंदर ये तूफान उमड़ा होगा। आपने कुछ मेरे ...

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लेखक के बारे में
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Pragya Verma

BACHPAN SE KAHANI PADHNE KA BAHUT SHOK THA MEGZIN OR NEWS PAPER MAI DHUNDTI THI... PRATILIPI MAI MERI KHOJ PURI HUYI.... OR EK BHARA PARIVAAR BHI MIL GYA😊🙏

समीक्षा
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    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    Rama Shrivastava
    01 जून 2020
    मैंने महसूस भी किया है कि बड़े लाड़ प्यार से पाली गयी सर्वगुणसम्पन्न बेटियां भी ससुराल में मान सम्मान नही पाती पता नहीं लोग बहुओं के मामले में इतने निर्दयी क्यों हो जातेहैं सही है नारी ही नारी की शत्रु है.
  • author
    19 अगस्त 2019
    अनायास कुछ अधूरी सी जिंदगानी दर्शाती रचना... स्वयं के स्वाभिमान को दरकिनार करके समाज की जंजीरों से बंधकर परिवार के दायित्व निभाने वाली गाय समान जिंदगी जीना कायरता की निशानी है.... पति नेक है,प्रिय है ,भावनाओ का आदर करता है तो जिल्लत वाली लाइफ जीने को विवश क्यो करे भला मानता हूं ये सब कहने की बाते है क्योकि हमारे देश मे हर दूसरे घर की यही स्थिति है लेकिन घुट घुट के मरने से बेहतर है कि हिम्मत दिखाकर काम किया जाए..इससे स्वयं के अन्तर्मन को कभी ग्लानि न होगी🙏🏼🙏🏼🙏🏼🙏🏼 रचना बेहद खूबसूरत लिखी आपने जो भाव पिरोये शब्दो मे वो काबिलेतारीफ👌👌👌👌👌👌
  • author
    Meenu Rawat
    03 जुलाई 2020
    आपने नारी की व्यथा को शब्दों में उकेर दिया। किंतु मुझे यह कहानी अधूरी लगी। क्या इसका दूसरा भाग भी है??
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    Rama Shrivastava
    01 जून 2020
    मैंने महसूस भी किया है कि बड़े लाड़ प्यार से पाली गयी सर्वगुणसम्पन्न बेटियां भी ससुराल में मान सम्मान नही पाती पता नहीं लोग बहुओं के मामले में इतने निर्दयी क्यों हो जातेहैं सही है नारी ही नारी की शत्रु है.
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    19 अगस्त 2019
    अनायास कुछ अधूरी सी जिंदगानी दर्शाती रचना... स्वयं के स्वाभिमान को दरकिनार करके समाज की जंजीरों से बंधकर परिवार के दायित्व निभाने वाली गाय समान जिंदगी जीना कायरता की निशानी है.... पति नेक है,प्रिय है ,भावनाओ का आदर करता है तो जिल्लत वाली लाइफ जीने को विवश क्यो करे भला मानता हूं ये सब कहने की बाते है क्योकि हमारे देश मे हर दूसरे घर की यही स्थिति है लेकिन घुट घुट के मरने से बेहतर है कि हिम्मत दिखाकर काम किया जाए..इससे स्वयं के अन्तर्मन को कभी ग्लानि न होगी🙏🏼🙏🏼🙏🏼🙏🏼 रचना बेहद खूबसूरत लिखी आपने जो भाव पिरोये शब्दो मे वो काबिलेतारीफ👌👌👌👌👌👌
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    Meenu Rawat
    03 जुलाई 2020
    आपने नारी की व्यथा को शब्दों में उकेर दिया। किंतु मुझे यह कहानी अधूरी लगी। क्या इसका दूसरा भाग भी है??