वो पहली बूंद थी बारिश की जो सीधे दर पर आई थी बूंदों ने सहम सहम कर तब कोई मीठी सी धुन सुनाई थी मदहोश हवाएं चलती झीनी घटाएं फैलीं रिम झिम रिम झिम होती बारिश है यह पहली मदहोश हवा का झोंका मुझसे ये...
साहित्य प्रेमी मैं मुख्यतया अपनी शायरी में छिपी हुई कहानियां सामने रखता हूं और मेरा मकसद वाहवाही पाना नहीं बल्कि यह देखना होता है कि मैं कामयाब हो पाया या नहीं मैंने अपनी जिंदगी का एक लंबा समय शायरी में बिताया है और अंत में मैं एक नया लेखक हूं जिसके पास ग़ालिब की दी हुई हिदायत है और प्रेमचंद की दी हुई जागरुकता
जय हिन्द 🇮🇳
सारांश
साहित्य प्रेमी मैं मुख्यतया अपनी शायरी में छिपी हुई कहानियां सामने रखता हूं और मेरा मकसद वाहवाही पाना नहीं बल्कि यह देखना होता है कि मैं कामयाब हो पाया या नहीं मैंने अपनी जिंदगी का एक लंबा समय शायरी में बिताया है और अंत में मैं एक नया लेखक हूं जिसके पास ग़ालिब की दी हुई हिदायत है और प्रेमचंद की दी हुई जागरुकता
जय हिन्द 🇮🇳
सुंदर रचना, लाजवाब पेशकश—दिल को छू लेने वाली अभिव्यक्ति!
आपकी कलम की गहराई सच में काबिले-तारीफ है।
मेरी विनम्र गुज़ारिश है कि मेरी रचना "मुस्ताक की आफरीन" भी ज़रूर पढ़ें और अपनी बहुमूल्य व निष्पक्ष समीक्षा देकर मार्गदर्शन करें।
आपकी राय मेरे लिए बेहद अहम है।
तहे दिल से शुक्रिया! 🙏
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