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क्रिया

4.6
588

डर – एक ऐसा भाव, जिसे शब्दों में नहीं समझाया जा सकता। व्यक्ति जब अपनी सीमित सोच से परे कुछ असामान्य महसूस करता है, तो उसके मन में भय जागृत होता है। डर की कोई निश्चित परिभाषा नहीं होती। इंसान बहुत ...

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लेखक के बारे में
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Rinkesh Jhuria

कागज़ और कलम ! बस और क्या......!

समीक्षा
  • author
    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    Riya Mittal
    15 जून 2022
    omg bht hi dangerous story hai ji bt bht hi mazaa aaya story pd kr
  • author
    Renu Kakkar
    31 मार्च 2023
    बहुत ही रोमांचक कहानी है पर विनीत का वदल जाना अच्छा नहीं लगा
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  • author
    Riya Mittal
    15 जून 2022
    omg bht hi dangerous story hai ji bt bht hi mazaa aaya story pd kr
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    Renu Kakkar
    31 मार्च 2023
    बहुत ही रोमांचक कहानी है पर विनीत का वदल जाना अच्छा नहीं लगा