क्या पता था यूँ रुला देगा मुझे । अपना साया ही दगा देगा मुझे ।। आदमी तेरी भला क्या हैसियत ; जो भी देना है खुदा देगा मुझे । कल हवाओं में हुई है गुफ़्तगू ; एक झोंका ही बुझा देगा मुझे । एक पौधा रोप ...

प्रतिलिपिक्या पता था यूँ रुला देगा मुझे । अपना साया ही दगा देगा मुझे ।। आदमी तेरी भला क्या हैसियत ; जो भी देना है खुदा देगा मुझे । कल हवाओं में हुई है गुफ़्तगू ; एक झोंका ही बुझा देगा मुझे । एक पौधा रोप ...