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अब माफी और नहीँ

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4.6

बरसती हुई बूंदों को देखती हुई शालिनी बैठी थी--चुप और शांत।कितना कुछ बीत चुका था जीवन में, लेकिन अभी जो बीता-वो अप्रत्याशित था।जीवन के पूरे अध्याय को बिताने के बाद,सब झेलने के बाद क्या सच में इतना ...