कहते है एक बच्चे की पहली गुरू उसकी "माँ" होती थी!जो नौ महीने उसे अपने गर्भ में रखने के बाद..उसके जन्म से लेकर उसके जीवनकाल के हर पड़ाव में उसका मार्ग- दर्शन करती है!उसे बाल्यकाल में सही-गलत में ...
हम्म! सबसे सशक्त किरदार हमें भव्या की माँ का लगा। ऐसे रिश्ते हमें अक़्सर ही लुभाते हैं जो ख़ून का दायरा लांघ जातें हैं। कथानक अच्छा है पर एक लेखक के तौर पर मैं कहना चाहूंगी कि आपको कहानी ज़ल्दबाज़ी में नहीं ख़त्म करनी थी। थोड़ा और विस्तार देना था। बाक़ी बेहतरीन प्रयास! कथानक लाज़वाब! आपसे ऐसे की ही उम्मीद थी..
लिखते रहिए! 🌱🤞
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हम्म! सबसे सशक्त किरदार हमें भव्या की माँ का लगा। ऐसे रिश्ते हमें अक़्सर ही लुभाते हैं जो ख़ून का दायरा लांघ जातें हैं। कथानक अच्छा है पर एक लेखक के तौर पर मैं कहना चाहूंगी कि आपको कहानी ज़ल्दबाज़ी में नहीं ख़त्म करनी थी। थोड़ा और विस्तार देना था। बाक़ी बेहतरीन प्रयास! कथानक लाज़वाब! आपसे ऐसे की ही उम्मीद थी..
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