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अनोखी गुरू

4.7
110

कहते है एक बच्चे की पहली गुरू उसकी "माँ" होती थी!जो नौ महीने उसे अपने गर्भ में रखने के बाद..उसके जन्म से लेकर उसके जीवनकाल के हर पड़ाव में उसका मार्ग- दर्शन करती है!उसे बाल्यकाल में सही-गलत में ...

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लेखक के बारे में

खुद की तलाश में निकली एक मुसाफिर🕊 Email ID/isakshi108@gmail.com

समीक्षा
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    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    रिया पाण्डेय
    08 सितम्बर 2022
    हम्म! सबसे सशक्त किरदार हमें भव्या की माँ का लगा। ऐसे रिश्ते हमें अक़्सर ही लुभाते हैं जो ख़ून का दायरा लांघ जातें हैं। कथानक अच्छा है पर एक लेखक के तौर पर मैं कहना चाहूंगी कि आपको कहानी ज़ल्दबाज़ी में नहीं ख़त्म करनी थी। थोड़ा और विस्तार देना था। बाक़ी बेहतरीन प्रयास! कथानक लाज़वाब! आपसे ऐसे की ही उम्मीद थी.. लिखते रहिए! 🌱🤞
  • author
    Vaaishnavi Chauhan "Sshri"
    07 सितम्बर 2022
    नो वर्ड्स....सब कुछ तो कह दिया तुमने 💜💜💜💜💜💜💜💜💜💜💜💜💜💜💜💜💜💜💜👏👏👏👏👏👏👏👏👏
  • author
    Manju Parihar
    11 सितम्बर 2022
    बहुत अच्छे 👌👌
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    रिया पाण्डेय
    08 सितम्बर 2022
    हम्म! सबसे सशक्त किरदार हमें भव्या की माँ का लगा। ऐसे रिश्ते हमें अक़्सर ही लुभाते हैं जो ख़ून का दायरा लांघ जातें हैं। कथानक अच्छा है पर एक लेखक के तौर पर मैं कहना चाहूंगी कि आपको कहानी ज़ल्दबाज़ी में नहीं ख़त्म करनी थी। थोड़ा और विस्तार देना था। बाक़ी बेहतरीन प्रयास! कथानक लाज़वाब! आपसे ऐसे की ही उम्मीद थी.. लिखते रहिए! 🌱🤞
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    Vaaishnavi Chauhan "Sshri"
    07 सितम्बर 2022
    नो वर्ड्स....सब कुछ तो कह दिया तुमने 💜💜💜💜💜💜💜💜💜💜💜💜💜💜💜💜💜💜💜👏👏👏👏👏👏👏👏👏
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    Manju Parihar
    11 सितम्बर 2022
    बहुत अच्छे 👌👌