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'ज़फ़र' आदमी उसको न जानिएगा

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भारत का अंतिम मुग़ल बादशाह ज़फर, शायर और खुशनवीस(calligrapher)ज़फर ,रियाया को अपने बच्चों की तरह चाहने वाला ज़फर ,धार्मिक भेदभाव को न मानने वाला ज़फर, सूफ़ी ज़फर ,हमारे सबसे बड़े विद्रोह/स्वतंत्रता ...

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लेखक के बारे में

13 मार्च 1952 खदाना,बुलन्दशहर में जन्म | माँ स्वर्गीया श्रीमती प्रेमवती , पिता स्वर्गीय महेन्द्र पाल सिंह | काशी हिन्दू और मेरठ विश्वविद्यालय से बी.एससी. और विधि की स्नातक डिग्री लेने के बाद 1976 से बुलन्दशहर में अधिवक्ता ,साथ ही हिन्दी से एम.ए. |1985 से उत्तर प्रदेश श्रम विभाग में श्रम प्रवर्तन अधिकारी | 2003 से परिवार के साथ सिडनी में ,2004 से लिखना आरम्भ किया | अब तक सात काव्य संकलन वल्लकी(2009)श्रीमती कुसुम चौधरी के साथ ,स्पन्दन (2010),स्तवन (2011),संगिनी (2013),अल्पना (2014) उषोराग (2018) ,पूर्णिमा (2019) और उपन्यास ‘ऋण मुक्त’ दो भागों में (2019) प्रकाशित |

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