ये किस मजधार फसी हूं, ना तुम्हें पाना चाहती हूं, ना तुम्हें खोना चाहती हूं, बहुत से राझ छिपे दिल में, ना होठो से बता सकती हूं, ना आंखो से छुपा सकती हूं, दुनिया से परे इस रिश्ते को, यूही रहने ...

प्रतिलिपिये किस मजधार फसी हूं, ना तुम्हें पाना चाहती हूं, ना तुम्हें खोना चाहती हूं, बहुत से राझ छिपे दिल में, ना होठो से बता सकती हूं, ना आंखो से छुपा सकती हूं, दुनिया से परे इस रिश्ते को, यूही रहने ...