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यादगार पल

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'यादगार पल' बात उन दिनों की है जब मैं कालेज में था, जहाँ मैंने उसे पहली दफा देखा था, क्या बताऊँ वो कितनी खूबसूरत लग रही थी, लाल सूट पर लाल चुनरी उस पर बहुत जच रही थी, उसकी जुल्फ़ें काली बदरी सी ...

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भास्कर सिंह

मुझे जानना है तो मुझसे मिलो, क्योंकि बिना मुझसे मिले कोई भी मुझे उतना ही जानेगा जितना वह मुझे समझ पाएगा।

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