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वो सुबह कभी तो आएगी

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खुले आसमान के नीचे एक हुजूम इकट्ठा था तन जड़ था, मन था आंदोलित ठंडी हवा में ओस की बूंदों को सुखाते हुए कभी आपस में , कभी खुद से कयास लगाते हुए चाय की चुस्कियों के बीच जगी आस पर पड़ी गर्द को हटाते हुए ...