pratilipi-logo प्रतिलिपि
हिन्दी

विवादग्रस्त

4.3
1808

घर के दरवाजे पर आकर एक क्षण के लिए वह ठिठक गया | सुबह भोजन की थाली पर बैठा ही था कि बेबात की बात पर पत्नी से विवाद हो गया था और बिना भोजन किए ही वह आफिस चला गया था | धीमे से उसने दरवाजा बजाया | ...

अभी पढ़ें
लेखक के बारे में
author
सतीश राठी

सतीश राठी जन्म : 23 फरवरी 1956 इंदौर . शिक्षा : एम .कॉम .एल .एल. बी . लेखन : लघुकथा , कविता, हाइकु, तांका, व्यंग्य, कहानी एवं निबन्ध विधा में समान रूप से निरन्तर लेखन | प्रकाशन : देश भर की विविध पत्र – पत्रिकाओं में सतत् प्रकाशन | संपादन : क्षितिज संस्था , इंदौर के लिए लघुकथा वार्षिकी ‘ क्षितिज ’ का संपादन | बैंककर्मियों के साहित्यिक संगठन ‘ प्राची ’ की उज्जैन इकाई के लिए ‘ सरोकार ’ [ अनियतकालीन पत्रिका ] का संपादन | पुस्तकें : तीसरा क्षितिज , मनोबल [ लघुकथा संकलन ] संपादित | पत्ते और नए पत्ते [ कविता संकलन ] संपादित | ज़रिये नज़रिये [ म.प्र.के व्यंग्य – लेखन का प्रतिनिधि संकलन ] का संपादन | समक्ष - संपादन एवं सहभागी लघुकथाकार [ म. .प्र. के पाँच लघुकथाकारों की एक सौ लघुकथाएँ का संकलन ] शब्द साक्षी है [ लघुकथा - संग्रह ] पिघलती आँखों का सच [ कविता –संग्रह ] अनुवाद : निबन्धों का अंग्रेजी ,मराठी ,एवं बंग्ला भाषा में अनुवाद | लघुकथाएँ मराठी , कन्नड़ , पंजाबी ,गुजराती में अनुवाद | पुरस्कार : ‘ साहित्य कलश ’ इंदौर द्वारा लघुकथा संग्रह – ‘ शब्द साक्षी है ’ पर राज्य स्तरीय ‘‘ ईश्वर पार्वती स्मृति सम्मान ’’ वर्ष – 2006 लघुकथा के क्षेत्र में विशेष योगदान के लिए ‘‘ माँ शरबती देवी सम्मान ’’ - 2012 मिन्नी , पंजाबी साहित्य अकादमी , बनीखेत . पंजाब द्वारा | सम्प्रति : सेवानिवृत्त, भारतीय स्टेट बैंक, इंदौर . सम्पर्क : ‘ त्रिपुर ’ आर – 451, महालक्ष्मी नगर , इंदौर – 452 010 म. प्र .

समीक्षा
  • author
    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    Mukesh Verma
    22 जून 2019
    जिन्दगी के जश्न को यूं ही मना लिया। कभी वो रूठी तो हमने मना लिया।। सुन्दर रचना धन्यवाद
  • author
    Arvind kumar tyagi
    19 अगस्त 2020
    khush rehene ke lia, gussa nahi pyar ka izhar chachia.
  • author
    BRIJ BHOOSHAN KHARE
    06 मई 2018
    लेखनी का प्रयास निश्चित रूप से सराहनीय है.
  • author
    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    Mukesh Verma
    22 जून 2019
    जिन्दगी के जश्न को यूं ही मना लिया। कभी वो रूठी तो हमने मना लिया।। सुन्दर रचना धन्यवाद
  • author
    Arvind kumar tyagi
    19 अगस्त 2020
    khush rehene ke lia, gussa nahi pyar ka izhar chachia.
  • author
    BRIJ BHOOSHAN KHARE
    06 मई 2018
    लेखनी का प्रयास निश्चित रूप से सराहनीय है.