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विश्वास

4.2
56536

बहुत घनी काली अँधेरी रात थी हाथ को हाथ नहीं सूझ रहा था आसमान में घने काले बादल छाये थे बहुत तेज़ हवाएँ चल रहीं थीं। दूर दूर तक अँधेरा सपाट मैदान था उनमें इक्का दुक्का पेड़ भयानक लग रहे थे। कच्ची ...

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लेखक के बारे में
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कविता वर्मा

मैं इंदौर से कविता वर्मा कहानियाँ कविताएँ उपन्यास लेख लिखती हूँ। मुझे लघुकथा बाल साहित्य और कहानी संग्रह के लिए अखिल भारतीय स्तर पर पुरस्कार मिल चुके हैं और अभी मध्यप्रदेश का प्रतिष्ठित साहित्यिक सम्मान वागीश्वरी पुरस्कार मेरे कहानी संग्रह कछु अकथ कहानी को मिला है।

समीक्षा
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    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    पंकज त्रिवेदी
    01 मार्च 2016
    कविता जी, बहुत ही उम्दा कहानी के लिए बधाई .. जीवन में विश्वास नहीं तो कुछ नहीं - सार्थक कहानी, और प्रभावक शैली  
  • author
    Dharmendra Bhatt
    01 अगस्त 2020
    सत्य है या सपना पर कुछ ऐसा भी है जो हमें मानना पड़ेगा,रोचक बढ़िया कहानी.
  • author
    अपर्णा साह
    16 फ़रवरी 2016
    vishwas shayad insani jindgi ka sabse bada aadhar hai .klpana bhi jahan falibhut ho jati hai.achhi kathank ko sundar shabdon me guna gaya hai.
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    पंकज त्रिवेदी
    01 मार्च 2016
    कविता जी, बहुत ही उम्दा कहानी के लिए बधाई .. जीवन में विश्वास नहीं तो कुछ नहीं - सार्थक कहानी, और प्रभावक शैली  
  • author
    Dharmendra Bhatt
    01 अगस्त 2020
    सत्य है या सपना पर कुछ ऐसा भी है जो हमें मानना पड़ेगा,रोचक बढ़िया कहानी.
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    अपर्णा साह
    16 फ़रवरी 2016
    vishwas shayad insani jindgi ka sabse bada aadhar hai .klpana bhi jahan falibhut ho jati hai.achhi kathank ko sundar shabdon me guna gaya hai.