विश्व गौरैया दिवस पर बाल रचना चिड़िया रानी चिड़िया रानी खाली आँगन, कूदा फाँदी दाना पानी सूनी डाली भूल कहानी चिडिया रानी चिड़िया रानी ********************** अलस्सुबह जब तुम आती । माँ दाने आँगन ...
क्या लिखूँ खुद के बारे में ..शब्दों से बना तन मेरा भाव रुधिर बहता है ।सामाजिक ताने बाने नस ,हड्डियों का ढाँचा है। अहसास बने वस्त्र मेरे यही स्वरूप देखा है।
पाखी प्रतीक है तो मनोरमा भी एक निशान है ।
सारांश
क्या लिखूँ खुद के बारे में ..शब्दों से बना तन मेरा भाव रुधिर बहता है ।सामाजिक ताने बाने नस ,हड्डियों का ढाँचा है। अहसास बने वस्त्र मेरे यही स्वरूप देखा है।
पाखी प्रतीक है तो मनोरमा भी एक निशान है ।
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