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विषाद

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4.2

देख माँ, सज गई मैं बन गई दुल्हन. पिता ने पुण्य तो कमा लिया होगा भाई का बोझ कुछ तो कम हुआ होगा देख कितनी रौनक है घर में, हर रिश्ता मुझसे जुड़ गया होगा, पर माँ अब भी कुछ तो दहक रहा मेरे मन में... ...