pratilipi-logo प्रतिलिपि
हिन्दी

विद्रोही

4.6
14216

आज दस साल से जब्त कर रहा हूँ। अपने इस नन्हे-से ह्रदय में अग्नि का दहकता हुआ कुण्ड छिपाये बैठा हूँ। संसार में कहीं शान्ति होगी, कहीं सैर-तमाशे होंगे, कहीं मनोरंजन की वस्तुएँ होंगी; मेरे लिए तो अब यही ...

अभी पढ़ें
लेखक के बारे में

मूल नाम : धनपत राय श्रीवास्तव उपनाम : मुंशी प्रेमचंद, नवाब राय, उपन्यास सम्राट जन्म : 31 जुलाई 1880, लमही, वाराणसी (उत्तर प्रदेश) देहावसान : 8 अक्टूबर 1936 भाषा : हिंदी, उर्दू विधाएँ : कहानी, उपन्यास, नाटक, वैचारिक लेख, बाल साहित्य   मुंशी प्रेमचंद हिन्दी के महानतम साहित्यकारों में से एक हैं, आधुनिक हिन्दी कहानी के पितामह माने जाने वाले प्रेमचंद ने स्वयं तो अनेकानेक कालजयी कहानियों एवं उपन्यासों की रचना की ही, साथ ही उन्होने हिन्दी साहित्यकारों की एक पूरी पीढ़ी को भी प्रभावित किया और आदर्शोन्मुख यथार्थवादी कहानियों की परंपरा कायम की|  अपने जीवनकाल में प्रेमचंद ने 250 से अधिक कहानियों, 15 से अधिक उपन्यासों एवं अनेक लेख, नाटक एवं अनुवादों की रचना की, उनकी अनेक रचनाओं का भारत की एवं अन्य राष्ट्रों की विभिन्न भाषाओं में अन्यवाद भी हुआ है। इनकी रचनाओं को आधार में रखते हुए अनेक फिल्मों धारावाहिकों को निर्माण भी हो चुका है।

समीक्षा
  • author
    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    Ahmad Irshad
    10 मई 2020
    ताकते हो मुझे जब उन झुकती पलकों से, समेटे हो ये दरिया इश्क़ का न जाने कितने बरसो से, मोहब्बत है तुम्हे मुझसे या मुझे शुरुआत करनी है, ज़रा तुम सामने आना मुझे अब बात करनी है ।।
  • author
    Kalpana Mishra
    10 मई 2020
    मुंशी जी की कहानी की समीक्षा करूं,ऐसा साहस मुझमें नहीं।उनके कथानक श्रेष्ठ थे श्रेष्ठ ही रहेंगे।
  • author
    Madhu Saxena
    10 मई 2020
    कथा सम्राट को नमन,। उनके लिए कुछ लिखने की हिम्मत नहीं।बचपन से आज तक पढ़ती आ रही हूं
  • author
    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    Ahmad Irshad
    10 मई 2020
    ताकते हो मुझे जब उन झुकती पलकों से, समेटे हो ये दरिया इश्क़ का न जाने कितने बरसो से, मोहब्बत है तुम्हे मुझसे या मुझे शुरुआत करनी है, ज़रा तुम सामने आना मुझे अब बात करनी है ।।
  • author
    Kalpana Mishra
    10 मई 2020
    मुंशी जी की कहानी की समीक्षा करूं,ऐसा साहस मुझमें नहीं।उनके कथानक श्रेष्ठ थे श्रेष्ठ ही रहेंगे।
  • author
    Madhu Saxena
    10 मई 2020
    कथा सम्राट को नमन,। उनके लिए कुछ लिखने की हिम्मत नहीं।बचपन से आज तक पढ़ती आ रही हूं