कविता उठो धरा के अमर सपूतों, नव प्राण भरो। उठा लो हाथों में बंदूकें और रिपुदमन तमाम करो।। हर घड़ी लेगी इंतहान, लेह लद्दाख में तुम्हारा । दिखला दो राणा के वंशज ...

प्रतिलिपिकविता उठो धरा के अमर सपूतों, नव प्राण भरो। उठा लो हाथों में बंदूकें और रिपुदमन तमाम करो।। हर घड़ी लेगी इंतहान, लेह लद्दाख में तुम्हारा । दिखला दो राणा के वंशज ...