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वैदिक विवाह श्रेष्ठ क्यों??

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एक विश्लेषण

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लेखक के बारे में
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Purnima

मैं एक लेखिका हूँ। एक लेखक की जिंदगी तो होली जैसी ही होती है ,हर रोज नई कल्पना के रंग लिए जाते है,उनमे अपनी भावनाओं का पानी मिलाकर अपनी कलम की पिचकारी से रंग बिरंगे शब्दों को उकेरा जाता है । लेखक स्वयं भी रंगों जैसा ही तो है वो अपनी कल्पनाओं की तरह हर रोज एक नए जीवन को जीता है,कहते है न लोग कभी पागल,कभी जिंदादिल,कभी दुःखी आत्मा कभी क्या इंसान है यार�����कितने रंगों में डूबा होता है लेखक हर रोज .....अपने ही रंग में ....हर रोज जीता है नई भावनाओं को । लेखक नाम के प्राणी की वेशभूषा भी तो अजीब ही होती है न ,आंखों पर चश्मा,अस्तव्यस्त जीवन और पहनावा ,कलम डायरी,और खुद में खोए हुए ।कुछ चिड़चिड़ा सा होता है ये प्राणी । writer, poet, motivational speaker, book addict, ias aspirant, m.a. in sanskrit,hindi ...जीवन यात्रा की एक यात्री

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