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तुम मरीचिका हो

4.5
328

तुम एक मरीचिका हो चमकती रहती हो तेज धूप में पानी के मानिन्द मैं कब तक भागूँ तुम्हारी खोज में मुझे प्यारी है मेरी प्यास और हाँ, तुम्हारा पानीपन भी बातें हैं ऐसी भी, वैसी भी मेरे किस्से, तुम्हारी ...

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लेखक के बारे में
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विवेक शाही

Assistant Professor Psychology

समीक्षा
  • author
    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    शुभम पंथ
    04 ಫೆಬ್ರವರಿ 2018
    कविता के अंत अकल्पनीय था
  • author
    मनीष गौतम
    15 ಜನವರಿ 2020
    उत्कृष्ट
  • author
    Sumedha Prakash
    02 ಅಕ್ಟೋಬರ್ 2018
    वाह वाह
  • author
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    शुभम पंथ
    04 ಫೆಬ್ರವರಿ 2018
    कविता के अंत अकल्पनीय था
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    मनीष गौतम
    15 ಜನವರಿ 2020
    उत्कृष्ट
  • author
    Sumedha Prakash
    02 ಅಕ್ಟೋಬರ್ 2018
    वाह वाह