अल्बर्ट हॉल के ठीक सामने वाली रोड के किनारे गुलमोहर के एक बूढ़े दरख़्त के नीचे एक टूटी हुई बेंच जिस पर पुते हरे रंग की पपड़ियाँ उखड़ चली थीं, पर बैठ कर उसे रोज़ देखना मेरा शगल था, अल सुबह वह...

प्रतिलिपिअल्बर्ट हॉल के ठीक सामने वाली रोड के किनारे गुलमोहर के एक बूढ़े दरख़्त के नीचे एक टूटी हुई बेंच जिस पर पुते हरे रंग की पपड़ियाँ उखड़ चली थीं, पर बैठ कर उसे रोज़ देखना मेरा शगल था, अल सुबह वह...