यह जो तेरी आंखों का काजल है दूर समुंदर में छाई हुई नीली परछाई सी है बस! यहीं दुआ है मेरी अब तुम मुझे इन आंखों का काजल बना लो मैं इन झील सी आंखों में खुद को इस तरह समा लूंगा तुम मुझे ढूंढती रह ...

प्रतिलिपियह जो तेरी आंखों का काजल है दूर समुंदर में छाई हुई नीली परछाई सी है बस! यहीं दुआ है मेरी अब तुम मुझे इन आंखों का काजल बना लो मैं इन झील सी आंखों में खुद को इस तरह समा लूंगा तुम मुझे ढूंढती रह ...