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तन्हाईयों के ढेर में ख्वाहिश दबी रही,

4.2
3666

तन्हाईयों के ढेर में ख्वाहिश दबी रही, जैसे कि रेगिस्तान में बाकी नमी रही । मुझको बिठाके चल दिया ऑटो जबउसको छोड़, मैं देखता रहा,वो मुझे देखती रही । रोते रहे कुछ लोग और जलते रहे कुछ घर, पर निंदकों की...

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समीक्षा
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  • author
    Vandana Singh
    25 मई 2026
    bahut acha likha hai aap chahe to mere story and poem padh sakte hai shayad aapko achi Lage
  • author
    रविंद्र कुमार
    02 जुलाई 2026
    "गुजरा हुआ वक़्त", https://pratilipi.app.link/ZjrISqb0q4b
  • author
    20 फ़रवरी 2024
    ख्वाहिशों के ढेर में कुछ कमी रही होंठो में मुस्कुराया नही,आंखों पर नमी बनी रही।
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    Vandana Singh
    25 मई 2026
    bahut acha likha hai aap chahe to mere story and poem padh sakte hai shayad aapko achi Lage
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    रविंद्र कुमार
    02 जुलाई 2026
    "गुजरा हुआ वक़्त", https://pratilipi.app.link/ZjrISqb0q4b
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    20 फ़रवरी 2024
    ख्वाहिशों के ढेर में कुछ कमी रही होंठो में मुस्कुराया नही,आंखों पर नमी बनी रही।