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तन्हाईयों के ढेर में ख्वाहिश दबी रही,

4.2
3675

तन्हाईयों के ढेर में ख्वाहिश दबी रही, जैसे कि रेगिस्तान में बाकी नमी रही । मुझको बिठाके चल दिया ऑटो जबउसको छोड़, मैं देखता रहा,वो मुझे देखती रही । रोते रहे कुछ लोग और जलते रहे कुछ घर, पर निंदकों की बस्तियों में रौशनी रही। हल है ये लोकतंत्र सियासत के हाथ का, जनता ही इस जुए से मगर जूझती रही । सूखे के बावज़ूद भी उस दूब को देखो, जाने वो इस अकाल में कैसे बची रही । बचपन गया, माँ भी गई,कोल्हू - कुएं गए, अब तो न रहट और न वो ढेकुली रही ।

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समीक्षा
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  • author
    Vandana Singh
    25 మే 2026
    bahut acha likha hai aap chahe to mere story and poem padh sakte hai shayad aapko achi Lage
  • author
    रविंद्र कुमार
    02 జులై 2026
    "गुजरा हुआ वक़्त", https://pratilipi.app.link/ZjrISqb0q4b
  • author
    20 ఫిబ్రవరి 2024
    ख्वाहिशों के ढेर में कुछ कमी रही होंठो में मुस्कुराया नही,आंखों पर नमी बनी रही।
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    Vandana Singh
    25 మే 2026
    bahut acha likha hai aap chahe to mere story and poem padh sakte hai shayad aapko achi Lage
  • author
    रविंद्र कुमार
    02 జులై 2026
    "गुजरा हुआ वक़्त", https://pratilipi.app.link/ZjrISqb0q4b
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    20 ఫిబ్రవరి 2024
    ख्वाहिशों के ढेर में कुछ कमी रही होंठो में मुस्कुराया नही,आंखों पर नमी बनी रही।