pratilipi-logo प्रतिलिपि
हिन्दी

तन्हाईयों के ढेर में ख्वाहिश दबी रही,

3610
4.2

तन्हाईयों के ढेर में ख्वाहिश दबी रही, जैसे कि रेगिस्तान में बाकी नमी रही । मुझको बिठाके चल दिया ऑटो जबउसको छोड़, मैं देखता रहा,वो मुझे देखती रही । रोते रहे कुछ लोग और जलते रहे कुछ घर, पर निंदकों की ...